Rajkumar Sachan Hori - Adyaksha -BADATA BHARAT

Friday, 12 February 2016

Why Are Indian Farmers Committing Suicide and How Can We Stop This Tragedy?, by Vandana Shiva

http://www.voltairenet.org/article159305.html


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Teak plantations

किसान करोड़पति कैसे बने 

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 आप छोटे किसान हैं तो आपके पास एक हेक्टेयर जमीन में टीक  (सागौन ) लगाने का लाभ बताते हैं। २ मीटर से २ मीटर की दुरी पर पेड़ लगाएं कुल २५०० पेड़ । दो वर्षो के बाद बीच बीच के पतले पेड़ निकालते रहें और इन्हे बेचते रहें जो बिडिंग में बिक जाती है । 
५ वर्षों बाद लगभग एक हज़ार टीक  बनाये रखें जिनकी कीमत २० से २५ वर्षों बाद लगभग २ करोड़ रूपये आपको मिलेंगे । यह सागौन आप और आपके आने वाले उत्तराधिकारिओं को मालामाल कर देगा । 
                                          राज कुमार सचान होरी 
horirajkumar@gmail.com
www.horiindianfarmer.blogspot.com
www.horiindiafarmer.blogspot.com

                                

Saturday, 6 February 2016

Madhumakhi Palan - Honey Bee Farming - मधुमक्खी पालन

http://www.hindiremedy.com/madhumakhi-palan-honey-bee-farming/


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Village Govt

                       3-           ग्राम सरकार  और नगर सरकार

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(3) ग्राम सरकार और नगर सरकार ़़़़  73 वाँ और 74 वाँ संविधान संशोधन  लागू कराना ।

       भारत के जनमानस को ध्यान में रख अपनी जनता के सशक्तीकरण के लिये कभी देश की संसद ने बड़े उत्साह और राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा की पवित्र भावना से गाँवों और नगरों को अपनी सरकार बनाने के लिये 73 वाँ और 74 वाँ संविधान संसोधन करते हुये देश कीजनता को  है अधिकार दिया था ।

                                 आज स्थिति यह हैै इतने महत्वपूर्ण संविधान संसोधन हम अभी तक सम्पूर्ण देश में लागू नहीं कर पाये हैं । जिन प्रदेशोंने इन्हें लागू किया है वहाँ के परिणाम बड़े अच्छे  , उत्साहवर्धक रहे हैं । परन्तु कुछ प्रदेश इन्हें अपने अधिकारों में हनन समझकर लागू नहीं कर रहे हैं । जिन प्रदेशों में इन्हें लागू नहीं किया गया उनकी स्थिति विकास की दृष्टि से असन्तोषजनक बनी हुयी है ।

                    देश की आधी जनता ग़रीबी रेखा के नीचे है ,विकास की दौड़ में अत्यन्त पीछे ।जनता की नियम क़ानून बनानें और संसाधनों के विकास में कोई भागीदारी नहीं है ।जबकि उक्त संसोधनों के पीछे जनता जनार्दन को सशक्त बनाने की भावना थी ।

       बदलता भारत/  इंडिया चेंजेज़ ( INDIA CHANGES ) ने इस प्रकरण में देश की नब्ज जानने की कोशिश की हैै़़़़ ़़़देश। के समस्त प्रधान , पंचायतों के प्रतिनिधि , ग्रामीण जनता 73 वाँ संसोधन लागू कराना चाहती है । इसके लिये समय समय पर आंदोलन भी होते रहते हैं । इसी तरह 74 वाँ संसोधन नगर निकायों के जनता के प्रतिनिधि - पार्षद और महापौर तथा नगरीय जनता लागू कराना चाहती है ।

                          आइए जनभावनाओं के अनुरूप देश की समस्त जनता की भलाई के लिये बिना किसी और विलम्ब के उक्त दोनों संसोधनों को पूर्ण निष्ठा से लागू करें। हम यह भी माँग करते हैं कि संसद एक संसोधन के द्वारा इन्हें स्वैच्छिक के स्थान पर अनिवार्य कर दे। जनता के इतने महत्वपूर्ण अधिकार राज्य सरकारों के भरोसे न छोड़े जाँय ।

          जनता के द्वारा जनता की सरकार के लिये भले ही देशव्यापी आंदोलन क्यों न छेड़ना पड़े ।

                 National Coordinator --Raj Kumar Sachan Hori 

                इंडिया चेंजेज़ ( INDIA CHANGES )(बदलता भारत )

www.badaltabharat.com ,indiachanges2013.blogspot.com , indiachanges2020blogspot.com ,horiindiachanges.blogspot.com , horibadaltabharat.blogspot.com ,Facebook.com/pages/India-changes ,

Eid -- indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com



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Thursday, 4 February 2016

Cash Crops

Indian farmers are always busy in traditional agriculture . Same wheat, paddy, millet , oilseeds and pulses etc , but they generally don't follow cash crops pattern . Horticultre , Fisheries , Bee keeping, pigrries etc . Teak ,bamboo and yuciliptus plantations are still the fields where attention is needed .

                             We should follow cash crops pattern .

Jaykisaan.blogspot.com 

कृषि को उद्योग का दर्जा

4 /कृषि को उद्योग का दर्जा 

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      कृषि के समस्त कार्य एक उद्योग की तरह हैं । लगातार पूंजी निवेश , स्रम , उत्पादन आदि समस्त क्रियायें उद्योगों की भाँति होती हैं । समर्थन मूल्य भी मज़बूरी मे ही सही सरकारों द्वारा जारी किये जाते हैं । कृषक और कृषि असंगठित क्षेत्र हैं इस लिये उद्योंगों की तरह अपने मूल्य का निर्धारण नहीं कर पाता है । लागतें बढ़ती जाती हैं जिससे शुद्ध आय कम हो जाती है । कीमतों का निर्धारण आय और व्यय के आधार पर किया जाता है परन्तु कृषि में ऐसा नहीं हो रहा है । यहाँ किसान फ़सलें बो तो सकता है पर उनकी कीमत उद्योंगो की तरह स्वयं निर्धारित नहीं कर सकता । 

                    कृषि के अंतर्गत लागत अधिक और आय कम होने के कारण किसानों का जीवनयापन तक कठिन है । देश भर  में किसानों के द्वारा आत्महत्या की घटनायें भी प्रकाश में आती रहती हैं । कृषि को लाभकारी बनाना किसानों के लिये तो ज़रूरी है ही समस्त देश के विकास और अनाज उपलब्धता के लिये भी आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है ।

            एक उद्योग की तरह बैंकों से लोन भी स्वीकृत नहीं हो सकता ।कृषि को स्वयं बैंक घाटे का क्षेत्र मानता है। परन्तु दोनों स्थितियों से किसान को मुक्ति मिल सकती है यदि कृषि को उद्योग का दर्जा दे दिया जाय ।

                 राज कुमार सचान होरी 

                राष्ट्रीय अध्यक्ष

                 बदलता भारत(INDIA CHANGES )

www.badaltabharat.com , horiindiachanges.blogspot.com

           



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HoriIndiaFarmers

http://horiindianfarmers.blogspot.in